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पुलिस ने दिखाई इंसानियत, रईस बनारसी के सुपुर्दे खाक तक परिजनों के साथ खड़े रहें पुलिसकर्मी व अधिकारी

रिपोर्ट- अमरेन्द्र पाण्डेय 

वाराणसी: पुलिस को लेकर आम लोगों की अवधारणा बेहद खराब होती है आज के समय में लोगों के मन मस्तिष्क में पुलिस की छवि उतनी अच्छी नहीं है. इसके पीछे कई लोगों का मानना है कि पुलिस स्वार्थी होती है लोगों की नहीं सुनती, तरह-तरह के आरोप प्रत्यारोप पुलिस पर लगाये जाते हैं, लेकिन कल पुलिस ने जो इंसानियत दिखाई उसके आगे के ये सारे काल्पनिक आरोप प्रत्यारोप ध्वस्त हो गए. कल दिखा कि पुलिस अपने घर-परिवार को छोड़कर दिन-रात आपके लिए कैसे खड़ी रहती है.

दरअसल हुआ यह कि 14 सितंबर की शाम वाराणसी में आधे घंटे के अंदर दो लोगों की हत्या हो गई थी. उसमें देवनाथपुरा में राकेश अग्रहरि की हत्या और दूसरी नई सड़क के नजदीक लंगड़े हाफिज मस्जिद के पास यह युवक खुन से लथपथ तड़पते हुए मिला. उसे श्री शिवप्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय कबीरचौरा ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गयी. उस दिन देर रात तक युवक की पहचान नहीं हुयी. बाद में धीरे-धीरे यह सुगबुगाहट होने लगी कि यह युवक और कोई नहीं बल्कि 50 हजार का इनाममियां रईस बनारसी है.  पिता को शव पहचानने के लिए बुलाया गया पर वे भी शव नहीं पहचान सके. हालांकि 14 सितंबर को रात होने की वजह से राकेश अग्रहरि और युवक दोनों का शव कबीरचौरा के मर्चरी में रख दिया गया.

जब 15 सितंबर की सुबह हुई तो अस्पताल में दो महिलाएं चीत्कार मार कर रो रहीं थी. उनमे एक महिला रईस बनारसी की पत्नी थी और दूसरी उनकी बहन. वे अपने पति और भाई का चेहरा एक बार देखना चाहती थीं पर शव को सील कर दिया गया था और उसे अज्ञात में रखा गया था. इसलिए बिना डॉक्टर के उस सील को कोई नहीं खोल सकता था. उनकी पत्नी ने रोते हुए वाराणसी के एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह से बात की. एसपी सिटी ने मानवता दिखाई और कहा कि आप घबराइये मत, पुलिस शव आपको जरूर सुपुर्द करेगी. फिर दशाश्वमेध प्रभारी निरीक्षक बालकृष्ण शुक्ल ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया और इंसानियत के नाते हर संभव मदद की बात की.

 

पोस्टमार्टम के लिए शव को बीएचयू ले जाया गया. शव के साथ दशाश्वमेध थाने से उपनिरीक्षक रामबाबू सिंह, उपनिरीक्षक ओमनारायण शुक्ल, कांस्टेबल रामसमझ यादव, बृजेश सिंह, विनोद यादव और कांस्टेबल श्रीकुमार बीएचयू गये. वहां चूँकि पहले राकेश अग्रहरि का शव का पोस्टमार्टम हुआ इसलिए रईस के शव को 4 बजे के करीब पोस्मार्टम के लिए ले जाया गया. शव का पोस्टमार्टम हुआ और डॉक्टरों ने करीब 6 बजे बताया कि गोली नहीं मिल रही, इसलिए शव को कबीरचौरा हॉस्पिटल एक्सरे कराकर जल्दी ले आईये क्योकि पोस्मार्टम हॉउस भी साढ़े सात बजे तक हीं खुला रहेगा. कल लोलार्क मेला के चलते शहर में भीषण जाम था शव को कबीरचौरा पहुंचते पहुंचते 7 बज गए वहाँ एक्सरे रूम खुला ही नहीं था और न हीं अस्पताल के सीएमओ कॉल उठा रहे थे. काफी देर हो रही थी शव भी क्षत विक्षत हो गया था, ऐसे में दशाश्वमेध पुलिस ने एसपी सिटी को सूचित किया, एसपी सिटी ने तुरंत सीएमओं को फोन कर एक्सरे कराने का अनुरोध किया पर एक्सरे टेक्नीशियन ने आते आते काफी देर लगा दी. पूछने पर बताया कि मंदिर दर्शन करने गया था.

एक्सरे होते होते रात के 9 बज गए. अब सवाल यह उठा कि पोस्मार्टम हॉउस भी बंद हो गया फिर कैसे आगे की करवाई होगी? आज पोस्टमार्टम नहीं हुआ तो शव बदबू करने लगेगा अंतिम संस्कार भी नहीं हो पायेगा. इसपर एसपी सिटी ने सक्रियता दिखाते हुए बीएचयू चौकी इंचार्ज अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय को फोन करके पोस्टमार्टम हाउस खुलवाने को कहा पर पोस्टमार्टम हाउस बन्द हो चूका था. फिर भी चौकी इंचार्ज, एसपी सिटी और दशाश्वमेध पुलिस ने काफी मशक्कत करके आधी रात को पोस्मार्टम हॉउस खुलवा दी. पोस्टमार्टम हुआ उसके बाद भोर में शव को घर ले आया गया और लगभग सुबह उसे सुपुर्द खाक किया गया. मिट्टी के समय दशाश्वमेध थाने से चौकी इंचार्ज मो.अकरम भी पहुंच गए और शव यात्रा में शामिल हुए.

इसमें सबसे बड़ी बात यह रही की इस दौरान दशाश्मेध थाने के प्रभारी निरीक्षक,उपनिरीक्षक,और कांस्टेबल अंत्येष्टि तक साथ खड़े रहें. ये पुलिसकर्मी 50 घण्टे से भी ज्यादा समय तक बिना नींद और आराम के अपनी ड्यूटी से ज्यादा इंसानियत के लिए खड़े रहें. पसीने से इनकी वर्दी तरबतर हो चुकी थी वही शरीर भी पूरी तरह तक चूका था पर ये पुलिसकर्मी हटे नहीं डटे रहें. एसपी सिटी भी पल-पल में फोन कर परिजनों से बात करते रहें. रईस के परिजनों का कहना था कि लोग वेवजह पुलिस को बदनाम करते हैं, पुलिस क्या होती है, आज हमने देख लिया और जान लिया. कुल मिलाकर वाराणसी पुलिस ने कल एक क्रिमनल नहीं एक इंसान के साथ वो इंसानियत दिखाई जो एक मिसाल बन गयी. पुलिस के धैर्य, साहस, सहृदयता और सहानभूति की जितनी प्रशंसा की जाए उतना कम है.

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