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वाराणसी: पत्रकार का काम है निडर होकर सवाल पूछना- पुण्य प्रसून वाजपेयी

वाराणसी: पंडित कमलापति त्रिपाठी की 113वीं जयंती पर नागरी नाटक मंडली के सभागार में शुक्रवार को आयोजित समारोह के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने अपना वक्तव्य दिया. उनका भाषण 1947 से लेकर 2018 तक के विभिन्न घटना क्रमों को अपने में समेटे हुए था. उनके भाषण का सार यह था कि संवैधानिक संस्थाएं अपना काम नहीं कर रही हैं और उन्हें पंगु बना दिया गया है. उनके अनुसार दिल्ली में लगभग 2500 पत्रकार अपनी नौकरी छोड़कर विभिन्न राजनीतिक दल के नेताओं के लिए काम कर रहे हैं. पार्टियों के आईटी सेल में काम करते हैं. वो यह जानते हैं कि नेता भ्रष्ट है, इसके बावजूद उनके लिए काम करते हैं. नेता अपने आप में उद्योग हो गए हैं.

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उन्होंने कहा कि संसद में लगभग 130 ऐसे सांसद हैं, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज है. और वो हमारे लिए कानून बना रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट भी कई बार कह चुकी है कि “लोकतंत्र” को गम्भीर खतरा है. और वह खतरा यह है कि कहीं देश की जनता “भीड़तंत्र” का अभयस्त न हो जाए. देश संविधान से नहीं बल्कि कुछ लोगों की मर्जी से चल रहा है और जनता “लोकप्रिय” नारों में फंस गई है. अब तो संसद में कानून बनाकर राजनीतिक दलों को विदेशी चंदा लेने की छूट भी दे दी गई है. इस चंदे के बारे में उनसे कोई पूछताछ नहीं होगी. जाहिर है, जो विदेशी कम्पनी चंदा देगी, वह प्राकृतिक संसाधनों के मनमनी लूट की इजाजत चाहेगी.

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शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन बीमा आदि सभी क्षेत्रों का निजीकरण किया जा रहा है. राजनीतिक दलों का उद्देश्य किसी तरह सत्ता में बने रहना है. उन्होंने कहा कि यह सही है कि विपक्ष कमजोर हो गया है और कुछ नेता डर के मारे बोलना बंद कर दिए हैं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव बोल रहे थे, तो जेल चले गए, अब उनके लड़के मोर्चा संभाले हैं. यूपी में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती भी चुप्पी साधे हैं, परिभाषाएं बदली जा रही हैं. प्रारम्भ में अनेक वक्ताओं ने पुण्य प्रसून वाजपेयी की कार्यशैली की प्रसंशा करते हुए उन्हें महान पत्रकार बताया.

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जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि हम कोई “महान” नहीं हैं, बस अपना काम कर रहे हैं और सबको अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए. पत्रकार का काम है, सवाल पूछना और उसे पूछना चाहिए. इसके लिए नैतिक बल जरूरी है. और यह तभी होगा, जब वह ईमानदार हो. एवीपी न्यूज चैनल पर “मास्टर स्ट्रोक” कार्यक्रम में उठाए गए सवालों के सम्बन्ध में कहा कि हमने कुछ खास नहीं किया बल्कि सिस्टम के लोग ही हमें सूचनाएं देते थे, जिसे हमने दिखा दिया. कहा कि प्रत्येक पत्रकार को ऐसी सूचनाएं मिलती हैं, लेकिन आश्चर्य है कि लोग अपनी ड्यूटी ईमानदारी से नहीं कर रहे हैं.

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भगोड़े विजय माल्या और केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच राज्यसभा में हुई मुलाकात प्रकरण की अन्तरकथा के सम्बन्ध में उन्होंने विस्तार से जानकारी दी. समारोह की अधयक्षता लखनऊ के प्रोफेसर रमेश दीक्षित ने की. समारोह में मुख्य अतिथि राणा गोस्वामी, पूर्व सांसद राजेश मिश्र, पूर्व विधायक अजय राय, ललितेश्वर त्रिपाठी, प्रजानाथ शर्मा, सतीश चौबे आदि ने भी सम्बोधित किया. पं. कमलापति त्रिपाठी फाउण्डेशन के अध्यक्ष राजेशपति त्रिपाठी ने प्रशस्ति-पत्र देकर पुण्य प्रसून वाजपेयी को सम्मानित किया. संचालन प्रोफेसर सतीश चौबे ने किया.

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