September 20, 2020
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तीन साल से मनरेगा श्रमिकों को नहीं मिली मजदूरी, किया ब्लॉक का घेराव

श्रमिक भरण-पोषण योजना का एक भी किश्त मजदूरों को नहीं मिला

वाराणसी: रोहनियां/ आराजी लाइन तीन साल से राजातालाब तहसील क्षेत्र के मरूई गांव के श्रमिकों को मनरेगा से मजदूरी नहीं मिली। इससे वह भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। श्रमिकों ने ब्लॉक प्रमुख से मजदूरी दिलाए जाने की मांग की।

आराजी लाईन ब्लॉक के मरूई गांव में विगत तीन साल से मनरेगा के अंतर्गत काम करने वाले श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ। लॉकडाउन में जहां मजदूरों के पेट का निवाला छिन गया है वहीं दूसरी ओर प्रवासी श्रमिक भी मनरेगा जैसे कार्यों को करने से कतरा रहे हैं। गांव के सावित्री, संजू, गीता, सत्यदेव, बसंत लाल, राजकुमार, राजेंद्र, प्रकाश, मोतीलाल, मुन्नु, बुद्धिराम, लक्ष्मिना, रीता, पप्पू, चमेला, रामदुलारी, नगीना, मीना आदि ने ब्लॉक प्रमुख नगीना सिंह पटेल से गुहार लगाई है कि उन्होंने मनरेगा में कार्य किया। इस काम की मजदूरी आज तक नहीं मिल पाई और लाक डाउन के दौरान श्रमिक भरण-पोषण योजना का 1 हजार रुपये की एक भी किस्त उनके अकाउंट में नहीं दिया गया है वह भुखमरी की कगार पर हैं। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि डॉ महेंद्र सिंह पटेल ने मजदूरों को आश्वासन देते हुए कहा कि जांच कराकर तत्काल मजदूरी व श्रमिक भरण-पोषण योजना के किश्तो का भुगतान कराया जाएगा। इस संदर्भ में मनरेगा ब्लाक कोआर्डिनेटर अवधेश ने बताया कि गांव के जॉब कार्ड धारक श्रमिकों का आधार बेस्ड में पेमेंट होने के कारण केवाईसी लगने और तकनीकी गड़बड़ी के चलते बैंक द्वारा भुगतान नहीं हो पा रहा है। गांव में रोजगार सेवक का पद रिक्त है मस्टर रोल अपडेट नहीं हो पाया है और कई मजदूरों के बैंक अकाउंट दूसरे जिले का है इस कारण पेमेंट नहीं हो पा रहा है ऐसे में इनका सुधार कराकर तत्काल पैसा खाते में पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने बताया कि मजदूरों का पलायन रोकने व इन्हे रोजगार मुहैया कराए जाने के तहत शासन द्वारा लागू महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मजदूरी ना मिलने के कारण मजदूर तंगहाली में अपना जीवन गुजर बसर कर रहे है। गांव के सुभाष चन्द्र पटेल ने बताया कि सबसे मजेदार बात तो यह है कि कई फर्जी लोगों के नाम से भुगतान हुआ है, लेकिन कामगारों को भुगतान नहीं मिल पाया। मनरेगा मजदूर यूनियन के संयोजक सुरेश राठौड़ ने बताया कि हालत यह है कि मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम नहीं मिल पा रहा है काम मिला तो मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है मजदूरों को मनरेगा कानून के तहत बेरोजगारी भत्ता उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

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