June 2, 2020
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कोरोना संकट के बाद भी स्वीडन ने क्यों नहीं किया लॉकडाउन

स्वीडन यूरोप का एक देश है। यह उत्तरी यूरोप के स्कैंडेनेविया नाम के क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, फ़िनलैंड जैसे देश आते हैं। मार्च के आख़िर तक स्कैंडेनेविया क्षेत्र ही नहीं पूरे यूरोप के क़रीब सभी देशों में स्कूल व व्यापार बंद कर दिए गए थे और यात्रा पर प्रतिबंध लगाकर सभी नागरिकों से घर में रहने को कहा गया था। लेकिन स्वीडन में ऐसा नहीं था। वहाँ स्कूल भी खुले थे और सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान भी। लोग घरों में कैद नहीं थे। यानी कोरोना वायरस फैल रहा था, लोग मर भी रहे थे इसके बावजूद देश में सारी गतिविधियाँ सामान्य रूप से ही चल रही थीं।

दरअसल, कई लोगों को स्वीडन मॉडल में इसलिए दिलचस्पी है कि कोरोना वायरस ख़त्म हो नहीं रहा है, लॉकडाउन किए भी लंबा वक़्त हो गया है और इसका इलाज भी नहीं है। तो अब महीनों और वर्षों तक तो लॉकडाउन में रह नहीं सकते हैं! इसीलिए स्वीडन मॉडल लोगों को लुभा रहा है।

स्पेन में 2 लाख 72 हज़ार संक्रमण के मामले आए हैं और 27 हज़ार लोगों की मौत हुई। इंग्लैंड में 2 लाख 33 हज़ार पॉजिटिव केस आए और 33 हज़ार लोग मारे गए हैं। इटली में 2 लाख 23 हज़ार संक्रमण के मामले आए हैं और 31 हज़ार लोगों की मौत हुई। लेकिन स्वीडन में 28 हज़ार 582 पॉजिटिव मामले आए हैं और 3529 लोगों की मौत हुई है। इस लिहाज़ से देखा जाए तो स्वीडन में संक्रमण न तो काफ़ी कम है और न ही काफ़ी ज़्यादा। लेकिन मृत्यु दर क़रीब 12.47 फ़ीसदी है। इतनी ज़्यादा मृत्यु दर शायद ही किसी दूसरे यूरोपीय देशों में है।

कोरोना संक्रमण के ऐसे दौर से गुज़रने के बावजूद स्वीडन के अधिकारियों ने देश भर में लॉकडाउन को लागू नहीं किया और इस पर विश्वास जताया कि आम लोग सुरक्षित रहने में अपनी ज़िम्मेदारी निभाएँगे। हालाँकि अधिकारियों ने इतना ज़रूर किया कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना ज़रूरी किया और 50 से ज़्यादा लोगों के इकट्ठे होने पर पाबंदी लगाई। लेकिन स्कूल, रेस्तराँ, जिम और बार सभी प्रतिष्ठान खुले रहे। याद करें जब दिल्ली में गिनती के 3-4 कोरोना पॉजिटिव मामले आए थे तो दिल्ली सरकार ने 1-2 दिन के अंदर ही 20 लोगों से ज़्यादा के इकट्ठे होने पर प्रतिबंध लगा दिया था और बाद में तो सभी ग़ैर ज़रूरी सेवाएँ बंद कर दी गई थीं और लोगों के बाहर निकलने पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया था।

 

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