March 1, 2021
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BJP सरकार के मंत्री का विवादित बयान, ‘मुसलमानों को एक पूरा अलग पाकिस्तान देश दे दिया है’

नई दिल्ली: असम के विवादित सिटिजेनशिप बिल को लेकर भाजपा सरकार मंत्री ने विवादित बयान दिया है, जिसके बाद वह चर्चा में आए गए हैं. असम सरकार में मंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने कहा कि वह इस नागरिकता बिल का पूरा समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि हमने मुसलमानों को एक पूरा अलग देश पाकिस्तान दे दिया है, हम हिंदुओं को सिर्फ देश का नागरिकता दे रहे हैं. ऐसे में एक समय में हमने पूरा एक देश मुसलमानों को दे दिया है. अब हम हिंदुओं, इसाइयों, सहित अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को देश की नागरिकता दे रहे हैं.

आजादी के समय में किया वादा- आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल के अनुसार दूसरे देश के हिंदुओं, जैन, ईसाइयों, सिख, बौद्ध, पारसी धर्म के लोगों को देश का नागरिकता दी जाएगी, लेकिन मुसलमानों को इस बिल के तहत देश की नागरिकता नहीं दी जाएगी. एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए बिस्वास ने कहा कि राजनीति में आप किसी एक को खुश करने के लिए फैसला नहीं लेते हैं, असम में मैं नागरिकता संशोधन बिल का पूरी तरह से समर्थत करता हूं. उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक वादा है, जिसे बांग्लादेश, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान के लोगों को आजादी के समय दिया गया था.

मिलनी चाहिए नागरिकता- इस वायदे के तहत इन तमाम देशों के अल्पसंख्यकों को वादा दिया गया था कि जिसे भी यह लगता है कि जिसे भी ऐसा लगता है कि मां भारती उनकी मां है, उन्हें पूरा अधिकार है कि देश की नागरिकता हासिल हो. अगर एक मुसलमान यह साबित करे कि उसके साथ इस्लामिक देश में शोषण हुआ है तो हम इसपर बात कर सकते हैं. लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा क्योंकि ये लोग कुरान पर भरोसा करते हैं, जबकि हिंदू गीता पर भरोसा करते हैं. लिहाजा एक हिंदू हमेशा यह कह सकता है कि मेरे साथ शोषण हुआ है क्योंकि वह गीता को मानता है, लिहाजा भारत को अपना वादा पूरा करना चाहिए.

मुसलमानों को कई अधिकार दिया- बिस्वास ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि हमने असम में मुसलमानों को कई अधिकार दिए हैं, लेकिन असम पूरी तरह से लोकतंत्र के तहत चल रहा है, लेकिन यहां 1951 के बाद आए मुसलमानों ने यहां गलत तरीके से लोगों के अधिकार छीने हैं, लिहाजा हम नहीं चाहते हैं कि यहां के हिंदुओं को लगे कि उनके अधिकार को छीना जा रहा है. दरअसल मीडिया में इस तरह की खबर सामने आई थी कि असम के मुसलमानों को असम का शासन नहीं दिया जा सकता है.

 

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